January 22, 2010 at 2:13 am
by Rakesh Khatri · Filed under Snippets


ठण्ड के अपने मजे कोई खुले मैं, कोई मफलर मैं.
Around a time very close to the Delhi winter, the city administration suddenly realized to complete a long pending task. And several “illegal” night shelters were brought down..
Permalink
September 28, 2009 at 10:33 pm
by Rakesh Khatri · Filed under Opinions

“चाँद पर पानी मिल ही गया, अब शायद हमे भी मिल जायेगा.”
थोड़ा पानी चाँद से इनके लिये भी ला दो
Permalink
July 18, 2009 at 1:27 am
by Rakesh Khatri · Filed under Snippets

टहनी रोपण
पिछले दिनों के सुखद मानसून और तेज आंधी के कारण टूटी टहनी को यह तीनो बच्चे बडे लगन के साथ दुबारा रोपने की कोशिश कर रहे हैं.
लेकिन इन मासूमो को क्या पता की यह आंधी से गिरी एक डाल हे लाखो के तादाद में लोग आस पास पेड़ काट कर विनाश कर रहे है. चलिये नन्हों ने मरते पर्यावरण के प्रति कुछ सकारात्मक सोच तो रखी.
Sent by Shri Rakesh Khatri of Nature Foundation India
Previously on Delhi Greens:
Permalink
June 21, 2009 at 10:35 pm
by Rakesh Khatri · Filed under Snippets
The following image and related text is sent by our good friend and well wisher, Shri Rakesh Khatri of Nature Foundation India. The image was captured in Mayur Vihar Phase 3 but is a common sight in several parts of Delhi.

उपरोक्त चित्र सिद्ध प्लास्टिक बाबा की समाधी का हे . अगर आप यहाँ एक थैली बाँध कर मन्नत मांगते है तो यह बाबा आपके घर को प्लास्टिक थैलों से भरपूर कर देगा.
शर्म नहीं आती हमको. हम तो कचरा करते ही थे अपने धरम को भी इसमे जोड़ लिया. मन्नत और थैली बांधने का समय दिन या मौका ना खोये. आये और इस शर्मनाक कार्य मैं दिलखोल कर थैली बांधे. आगे आने वाली पीडी को (पर्यावरण प्रेमी माफ़ करियेगा)प्लास्टिक बैग प्रेमी बनाये.
आग्रह पूर्वक
सयोंजक
प्लास्टिक बैग फैलाओ कमेटी
धन्यवाद
Permalink